सुनहरे सपने

नमन 🙏 :- साहित्य संगम संस्थान
दिनांक :- 10/03/2021
दिवस :- बुधवार
विषय :- सुनहरे सपने
विधा :- संस्मरण
विषय प्रदाता :- आ. दीपमाला तिवारी जी
विषय प्रवर्तक :- आ. ऐश्वर्या सिन्हा जी

हर किसी को कुछ न कुछ सपने होते हैं, कुछ बनने का, कुछ करने का , कोई कर दिखाता है , तो कोई कह दिखाता है । बात उन तीन दोस्तों की है जो एक साथ ही रहते रहें , पर समय बलवान होता , समय बीतते गये आज तीनों अपने अपने राह पर संघर्ष कर रहे हैं । एक विज्ञान से , एक वाणिज्य से और एक कला से । तीनों का सपना एक ही था दुनिया से ग़रीबी मिटाना । पर ग़रीबी मिटाने के लिए धन की आवश्यकता होती है , जिसके लिए आज तीनों संघर्ष कर रहे हैं , पर आज वह हंसी नहीं है उन तीनों के मुंह पर , जिस हंसी के साथ तीनों ने सपने देखे रहें । खैर कोई बात न ,सपने वही है , सोच भी वही है पर भाव बदल गये है   , पता न ऐसा क्यों , पर हम सभी जानते "परिवर्तन ही संसार का नियम है" । आज भी वे तीनों एक - दूसरे से मिलते है , पर अपनी अपनी कार्यों के लिए पता न कहाँ गया उन तीनों की सुनहरे सपने , पर उन तीनों की सपने को बताने में मैं भी असमर्थ हूँ , क्योंकि मैंने शुरू में ही कह दिए हैं - कि कोई सपने कर दिखाते हैं तो कोई कह दिखाते है ।

✍️  रोशन कुमार झा 
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज,कोलकाता
ग्राम :- झोंझी , मधुबनी , बिहार,
मो :- 6290640716 , कविता :- 19(31)

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